Thursday, February 25, 2010
होली
दोस्तों आप सभी को होली की हार्दिक शुभकामनाये, होली आप सभी के जीवन में अपार खुशियाँ लाये और आपके जीवन को रंगीन बनाये !
Monday, January 25, 2010
Tuesday, January 12, 2010
मकर सक्रांति की शुभकामनाये
नमस्कार दोस्तों कैसे हो ? आशा करता हू की अच्छे ही होंगे, एक दिन बाद मकर सक्रांति है तो सोचा की आप सभी को बता दू की राजगढ़ में मकर सक्रांति कैसे मनाई जाती है l
दोस्तों वैसे तो राजगढ़ में भी मकर सक्रांति वैसे ही मनाई जाती है जैसे और जगहों पर मनाई जाती है इस दिन लोग दान दक्षिणा करते है, गायो को चारा खिलाया जाता है, तिल के लड्डू बनाये जाते है और साथ में हलवा, पुड़ी, पूए, खीर, दालके आदि बनाए जाते है लेकिन एक चीज इस दिन यहाँ अलग होती है जो और जगहों पर नहीं होती है(कुछ जगहों पर हो भी सकती है ) दोस्तों राजगढ़ में मकर सक्रांति पर कंचे(कांच की गोलिया) खेले जाते है इस दिन यहाँ पर बच्चे से लेकर बड़े तक सभी कंचे खेलते हुए देखे जा सकते है राजगढ़ में इसे गोली खेलना बोला जाता है, इन गोलियों से कई तरह के खेल खेले जाते है जैसे की खड़ीचोट, कटपिल, ऊनापुरा, ब्लास्तर आदि l जब हम छोटे थे तो सक्रांति से महीनो पहले ही गोली खेलना शुरू कर देते थे, सच में बहुत मज़ा आता था, सक्रांति पर कुण्ड मोहल्ले में गोली खेलने वालो का मेला सा लग जाता था, मगर अब तो सक्रांति पर घर भी जाना नहीं होता है तो गोली खेलना तो दूर की बात है आज मेरा बहुत मन कर रहा है गोली खेलने का पर क्या करू l दोस्तों अगर तुम राजगढ़ जा रहे हो तो गोली जरूर खेलना और खूब मज़े करना अपने बचपन को एक बार फिर से जी लेना l अभी लिखने को तो बहुत सी बाते है मगर अब मुझे नींद भी आ रही है और फिर सुबह क्लास के लिए भी जाना है तो दोस्तों अभी मैं अपने शब्दों को विराम देता हू आप सभी को मकर सक्रांति की बहुत बहुत शुभकामनाये l
दोस्तों वैसे तो राजगढ़ में भी मकर सक्रांति वैसे ही मनाई जाती है जैसे और जगहों पर मनाई जाती है इस दिन लोग दान दक्षिणा करते है, गायो को चारा खिलाया जाता है, तिल के लड्डू बनाये जाते है और साथ में हलवा, पुड़ी, पूए, खीर, दालके आदि बनाए जाते है लेकिन एक चीज इस दिन यहाँ अलग होती है जो और जगहों पर नहीं होती है(कुछ जगहों पर हो भी सकती है ) दोस्तों राजगढ़ में मकर सक्रांति पर कंचे(कांच की गोलिया) खेले जाते है इस दिन यहाँ पर बच्चे से लेकर बड़े तक सभी कंचे खेलते हुए देखे जा सकते है राजगढ़ में इसे गोली खेलना बोला जाता है, इन गोलियों से कई तरह के खेल खेले जाते है जैसे की खड़ीचोट, कटपिल, ऊनापुरा, ब्लास्तर आदि l जब हम छोटे थे तो सक्रांति से महीनो पहले ही गोली खेलना शुरू कर देते थे, सच में बहुत मज़ा आता था, सक्रांति पर कुण्ड मोहल्ले में गोली खेलने वालो का मेला सा लग जाता था, मगर अब तो सक्रांति पर घर भी जाना नहीं होता है तो गोली खेलना तो दूर की बात है आज मेरा बहुत मन कर रहा है गोली खेलने का पर क्या करू l दोस्तों अगर तुम राजगढ़ जा रहे हो तो गोली जरूर खेलना और खूब मज़े करना अपने बचपन को एक बार फिर से जी लेना l अभी लिखने को तो बहुत सी बाते है मगर अब मुझे नींद भी आ रही है और फिर सुबह क्लास के लिए भी जाना है तो दोस्तों अभी मैं अपने शब्दों को विराम देता हू आप सभी को मकर सक्रांति की बहुत बहुत शुभकामनाये l
Wednesday, January 6, 2010
चोरों को पकड़कर पीटा, खंभे से बांधा

राजगढ़ में सराय बाजार में बुधवार रात आठ बजे मोबाइल फोन खरीदने के बहाने दुकान से चोरी कर भाग रहे दो लड़कों को लोगों ने पकड़कर पीट दिया, बिजली के खंभे से बांध दिया। बाइक सवार लड़कों ने दुकान से मोबाइल पसंद कर लिया और खरीदने की बात कही। दुकानदार जब बिल बनाने लगा तो दोनों युवक बिना पैसे दिए मोबाइल लेकर बाइक पर भागने लगे। इस पर दुकानदार के शोर मचाने पर लोगों ने दोनों को पकड़ कर मोबाइल बरामद कर लिया। जामड़ोली के साजन मीणा और रामकेश मीणा के खिलाफ चोरी का मामला दर्ज कर उन्हें गिरतार कर लिया।
Friday, December 25, 2009
क्रिसमस और नए साल की शुभकामनाये l
दोस्तों सभी को क्रिसमस मुबारक हो, दुआ करता हू की ये क्रिसमस आप सभी की जिंदगी में अपार खुशिया लाये , आज काफी दिनों बाद लिखने का मौका मिला है आजकल थोडा व्यस्त रहता हु क्या करे कम ही इतना होता है की वक़्त ही नहीं मिल पाता
राजगढ़ गए हुए भी काफी दिन हो गए और अब तो लगता है की नए साल में ही जा पाऊंगा, राजगढ़ की तो कोई खबर है नहीं अभी मेरे पास अगर होगी तो आपको जरूर बताऊंगा, दोस्तों अभी मैंने एक नया ब्लॉग बनाया है http://hansodilse.blogspot.com/ जिसमे मैं अपने बचपन के शौक को आगे बढ़ा रहा हू यहाँ मैं अपनी कविताएं आपके साथ शेयर कर रहा हू , अगर वक़्त मिले तो मेरे ब्लॉग पर आये और मेरी कविताओ का आनंद उठाये, दोस्तों नया साल आ रहा है और आप सभी ने नया साल मानाने की तैयारी कर ली होगी और जिन्होंने नहीं की है वो शायद कर लेंगे, दोस्तों धूम धाम से नए साल का स्वागत करे, आप सभी को मेरी और से नए साल की लख लख बधाईया, अब काफी देर हो चुकी है और मुझे नींद भी आ रही है आखिर २:३० बज गए है तो दोस्तों फिर मिलते है चलते चलते, क्रिसमस और नए साल की फिर से शुभकामनाये l
राजगढ़ गए हुए भी काफी दिन हो गए और अब तो लगता है की नए साल में ही जा पाऊंगा, राजगढ़ की तो कोई खबर है नहीं अभी मेरे पास अगर होगी तो आपको जरूर बताऊंगा, दोस्तों अभी मैंने एक नया ब्लॉग बनाया है http://hansodilse.blogspot.com/ जिसमे मैं अपने बचपन के शौक को आगे बढ़ा रहा हू यहाँ मैं अपनी कविताएं आपके साथ शेयर कर रहा हू , अगर वक़्त मिले तो मेरे ब्लॉग पर आये और मेरी कविताओ का आनंद उठाये, दोस्तों नया साल आ रहा है और आप सभी ने नया साल मानाने की तैयारी कर ली होगी और जिन्होंने नहीं की है वो शायद कर लेंगे, दोस्तों धूम धाम से नए साल का स्वागत करे, आप सभी को मेरी और से नए साल की लख लख बधाईया, अब काफी देर हो चुकी है और मुझे नींद भी आ रही है आखिर २:३० बज गए है तो दोस्तों फिर मिलते है चलते चलते, क्रिसमस और नए साल की फिर से शुभकामनाये l
Saturday, November 14, 2009
यार पांच आदमी आएंगे तब फिल्म चलाएगा
गुरुवार को बारिश का मौसम था और अपन राजगढ़ में थे, घर पर सीआईडी (सोनी का टीवी शो, आजकल अपना फेवरेट शो) देख रहा था। तब ही राजीव जैन (मेरा हमनाम दोस्त) का फोन आया, यार टाकिज तक आ जाओ, फिल्म देखेंगे। मैंने कहा राजगढ़ में फिल्म यार क्यूं मजाक कर रहा है। बोला टिकट ले लिए हैं, आ जा। मैं घर पर बिना बोले नवरंग टाकिज तक चला गया। वहां देखा तो बारिश के कारण लोग नदारद, हम सिर्फ तीन जने। दोस्तों ने बताया कि पांच लोग होने की शर्त पर ही यह फिल्म चलाएगा। काफी दिन हो गए थे राजगढ़ के टाकिज में फिल्म देखे अंदर पहुंचे और यूं समçझए हमारे लिए स्पेशल शो चल रहा था। बस नीचे जनरल में कुछ बीस- पच्चीस लोग और आ गए थे। फिल्म थी अक्षय- कैटरीना अभिनीत ब्लू।लोग कम थे इसलिए भाई ने बिना इंटरवेल के सवा छह बजे शुरू हुई फिल्म को साढ़े आठ बजे खत्म। खैर फिल्म की कहानी फिर कभी। पर अपन को कम से कम पांच आदमियों के साथ आने पर फिल्म दिखाने वाला आइडिया ठीक वैसे ही लगा जैसे लापतागंज (सब टीवी का सीरियल) के थिएटर में फिल्म देख रहे हों।
Saturday, October 24, 2009
अब तांगे नहीं दिखते
अब अपने राजगढ से तांगे (घोडागाडी) गायब हो गए हैं। उनकी जगह ऑटो ने ले ली है। यूं तो समय के साथ बदलाव जरूरी है, पर परिवहन का पुराना साधन गायब हो गया है। यह सोचकर दुख होता है। मुझे याद है बचपन में तीन जगह तांगे दिखाई देते थे।पहला राजगढयहां स्टेशन से गोल मार्केट तक का तीन रुपए में तांगे के सफर में मजा आता था। बाद में यह किराया पांच रुपए हो गया। तांगे चार-पांच से घटकर एक ही रह गया। और 2008 आते आते तांगे खत्म हो गए। इनकी जगह ऑटो ने ले ली है, बेशक ये जल्दी पहुंचा देते हैं। पर जो मजा तांगे में आता था वह ऑटो में नहीं।
तांगे वाली दूसरी जगह थी मंडावरयहां के बस स्टैंड से हमारे पैतृक गांव गढ हिम्मतसिंह तक का तीन किलोमीटर का सफर तांगे में करने में मजा आता था। कई बार तो रास्ते में एक ढलान वाली जगह पानी भरे होने से तांगे को पार करने में मजा आता था। मुझे मेरे बडे भैया बताते हैं कि जब मां के साथ जन्म के बाद जब मैंने पहली बार सफर किया तो वह भी तांगे में किया। बचपन में उन्होंने कई बार कहा कि मम्मी तुम्हे तांगे में अस्पताल से लाई।
तीसरी जगह थी श्रीमहावीरजीमैं दीपावली के अगले दिन कई साल बाद जब जैन तीर्थ क्षेत्र श्रीमहावीरजी गया तो मुझे वहां मंदिर के बाहर एक तांगा देखकर सुकून पहुंचा। यहां तांगा अभी भी मौजूद है। हां बस इसका कारण दूसरा है। तीर्थ यात्री बडे बडे शहरों से बडी गाडियों में आते है तो वे अपने बच्चों का जी बहलाने के लिए गाडी छोड तांगे में सफर करते है। खैर इससे तांगेवाले की रोजी रोटी भी चल रही है और मुझे ब्लॉग के लिए तांगे का फोटो मिल गया वर्ना मैं कब से सोच रहा था तांगे पर लिखने के लिए।
Subscribe to:
Posts (Atom)

